नासा ने क्यों नही बचाई भारत की इस शान की जान।

जब भी मुझे भारत की इस बेटी की याद आती है तो मेरा दिल रो देता है।आज बात करेंगें कल्पना चावला की जो एक ऐसी लड़की थी जो खोजे नही मिलेगी ।कल्पना चावला सिर्फ अपने माँ बाप की ही बेटी नही बल्कि पूरे भारत की बेटी थी। आज भी जब अंतरिक्ष में जाने का जिक्र आता है तब हर भारतीय की जुबां पर कल्पना चावला की बातें होने शुरू हो जाती

कल्पना चावला का कहना था कि मैं अंतरिक्ष के लिए बनी हूं।उनका कहना था कि मैंने अपनी जिंदगी का हर पल अंतरिक्ष के लिए बिताया है और मैं इसी के लिए ही मरूंगी लेकिन ,वह यह नहीं जानती थी कि उनका यह बयान सचमुच में उनकी जान ले सकता है।

कल्पना चावला को गुजरे हुए आज लगभग 17 साल हो चुके हैं लेकिन जब कल्पना चावला की बात जुबां पर आती है तब 17 साल पहले का वह घाब आज भी तरोताजा हो जाता है। इस घटना से जुड़े कई विवाद सामने आते हैं लेकिन यह विभाद कितने सच हैं और कितने झूठ यह कोई नहीं जानता। कल्पना चावला का जन्म साल 1962 में भारत के हरियाणा राज्य के करनाल में हुआ था।

उन्होंने अपनी प्रारंभिक पढ़ाई अपने गांव हरियाणा से ही की थी। आठवीं कक्षा में जब वो थी तब उनका मन अंतरिक्ष में जाने को करता था वह अपने खाली समय में हवाई जहाजों ,रॉकेट ,मिसाइलों की तस्वीरें अपनी ड्राइंग बुक में बनाया करती थी।दिन के 24 घंटों में से काफी समय वह आसमान में देखते हुए गुजार देती थी। उनके इस सपने को पूरा करने की पहली सीढ़ी थी चंडीगढ़ का पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज। इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद कल्पना चावला ने अपना रुख अंतरिक्ष के लिए मोड़ लिया।

1982 में संयुक्त राज्य अमेरिका में चली गई। अपनी आगे की पढ़ाई यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास यूनिवर्सिटी से की थी।अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद 1995 में कल्पना चावला को नासा कंपनी के साथ काम करने का मौका मिला। उस समय कल्पना चावला 33 साल की थी यह कल्पना चावला के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि थी नासा में अंतरिक्ष यात्री के तौर पर शामिल होने के बाद 1998 में उन्हें पहली स्पेस उड़ान के लिए चुना गया। उन्होंने 6 क्रू एस्ट्रोनॉट्स के साथ अंतरिक्ष की उड़ान भरी। इसके साथ वह अंतरिक्ष में जाने वाली भारत की पहली महिला बन गई थी।

कल्पना चावला ने अंतरिक्ष की उड़ान स्पेस शटल एसपीएस 87 से की थी।अपनी पहली यात्रा के दौरान उन्होंने अंतरिक्ष में 372 घंटे बिताए और पृथ्वी की 252 परिक्रमा पूरी की। इस तरह कल्पना चावला ने अपने पहले मिशन को सफलतापूर्वक पूरा किया उसके बाद 2001 में उन्हें नासा द्वारा दोबारा से स्पेस में जाने का मौका मिला।

इस मिशन पर जाने वाली कल्पना चावला सिर्फ अकेली ही नहीं थी बल्कि एक पूरी एस्ट्रोनॉट की टीम को तैयार किया गया था। हालांकि यह मिशन 2001 में उड़ान भरने वाला था लेकिन तकनीकी खराबी के चलते इस मिशन को बार-बार डिले किया गया देरी का यह सिलसिला काफी समय तक जारी रहा और देखते ही देखते 2 साल का समय गुजर गया इतनी लंबी अवधि के बाद स्पेस शटल कोलंबिया की तकनीकी खराबी थमने का नाम ही नहीं ले रही थी।

सन 2003 तक कोलंबिया की यात्रा को 18 बार नाकारा गया था। जैसे तैसे करके नासा ने कोलंबिया को ठीक किया उसके बाद 16 जनवरी सन 2003 को स्पेस शटल कोलंबिया को स्पेस में भेजा गया। कल्पना चावला ने जब स्पेस शटल कोलंबिया के साथ अपनी दूसरी उड़ान भरी थी तो बो नही जानती थी कि यह उनकी आखिरी उड़ान हो सकती है। दरअसल जब स्पेस शटल कोलंबिया लांच किया गया था तब सब कुछ अच्छा लग रहा था ।

अंतरिक्ष में यान सही तरीके से काम कर रहा था और यह 16 दिनों का अंतरिक्ष मिशन था। इस दौरान कल्पना चावला और उनके साथी वहां की हर खबर नासा तक पहुंचाते रहे। मिशन पूरा होने के बाद अब उन्हें वापस धरती पर लौटना था। 1 फरवरी 2003Y ही बो दिन था जब लोग स्पेस शटल कोलंबिया का बेसब्री से लौटने का इंतजार कर रहे थे,लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था जब लोग इस यान के वापस आने का इंतजार कर रहे थे तभी खबर आई की है यहा पृथ्वी के बाताबरण में आने पर तहस- गया और बाकी सभी मेंबर के साथ कल्पना चावला भी मारी गई।उस यान का मलबा टैक्सेस नामक शहर पर गिरा।

इस खबर के आते ही सभी लोगों के मन में एक ही सवाल था की लॉन्चिंग के दौरान यान में कोई भी कमी नही थी पर यह हादसा कैसे हो गया।बैज्ञानिकों का मानना था कि जैसे ही यान ने पृथ्वी के बाताबरण में प्रवेश करते समय वैसे ही उसकी हीट इंसुलेशन पर दबाव पड़ा जिससे वह फट गई और यान का तापमान बढ़ने से यान दुर्घटनाग्रस्त हो गया ।नासा के इस बयान पर उस समय में तो सब ने सहमति जताई लेकिन लोगों द्वारा कई कयास भी लगाए गए।

कुछ लोगों ने नासा के काम पर भी संदेह किया। इतनी बड़ी दुर्घटना के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराया। कल्पना चावला का यह दुख जहां हर भारतीय के लिए घर कर गया था वहीं पर नासा के लिए भी बहुत बड़ी निराशा बन गई थी। इस घटना की वजह से स्पेस शटल अंतरिक्ष में भेजने को दो से अधिक सालों तक निलंबित कर दिया गया क्योंकि इससे पहले भी स्पेस शटल चैलेंजर जैसा खतरनाक हादसा हो चुका था जोकि उड़ान भरने के 73 सेकंड के बाद ही तहस-नहस हो गया और इसके अंदर बैठे साथ क्रू मेंबर की मौके पर ही मौत हो गई थी।
http://atrainfullofknowledge.weebly.com/blog/may-02nd-20208077579